नई दिल्ली : ने कहा कि वह तमिलनाडु के मंत्री की ' के उन्मूलन' संबंधी टिप्पणी को लेकर विभिन्न राज्यों में दर्ज प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने के अनुरोध वाली याचिका पर अप्रैल में सुनवाई करेगा। उदयनिधि की याचिका पर न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि इस पर एक अप्रैल से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
चार मार्च को याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उदयनिधि की टिप्पणी को लेकर अप्रसन्नता जताई थी। अदालत ने सवाल किया था कि बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का दुरुपयोग करने के बाद उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने के लिए अदालत का रुख क्यों किया है। शीर्ष अदालत ने उदयनिधि से कहा था कि मंत्री होने के नाते उन्हें बयान देते समय सावधानी बरतनी चाहिए थी। उनके संभावित परिणामों के प्रति सचेत रहना चाहिए था।उदयनिधि कौन हैं
तमिलनाडु के युवा कल्याण और खेल मंत्री उदयनिधि, मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के बेटे हैं। सितंबर 2023 में एक सम्मेलन में उदयनिधि ने कहा था कि सनातन धर्म सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है और इसे जड़ से उखाड़ फेंकना चाहिए। सनातन धर्म की तुलना कोरोना वायरस, मलेरिया और डेंगू से करते हुए उन्होंने कहा कि इसे मिटा देना चाहिए।वकील अभिषेक सिंघवी ने रखी बात
इसमें उदयनिधि की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने पीठ को बताया था कि इन सभी में शीर्ष अदालत प्राथमिकियों को जोड़ने पर सहमत हुई थी। सिंघवी ने चार मार्च को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत से कहा था कि मैं मामले के गुण-दोष पर एक शब्द भी नहीं कह रहा हूं, मैं इसे उचित नहीं ठहरा रहा हूं या आलोचना नहीं कर रहा हूं। प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने की याचिका से मामले के गुण-दोष पर फर्क नहीं पड़ेगा।from https://ift.tt/KMRH2xa
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