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Friday, 12 April 2024

बिहार: दो IAS के ईगो में पिस रहा राजभवन और शिक्षा विभाग? राज्यपाल के प्रधान सचिव के नाम केके पाठक की नई चिट्ठी

पटना: बिहार में राजभवन और शिक्षा विभाग की टकराहट अब दो आईएएस अधिकारियों की ईगो (अहंकार) की लड़ाई बनती जा रही है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने राज्यपाल-सह-कुलाधिपति राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल. चोंग्थू को काफी सख्त लहज में चिट्ठी लिखा है। इसमें कई नियमों का हवाला दिया गया है। जिसमें बताया गया है कि राज्यपाल को क्या-क्या अधिकार हैं। इसकी कॉपी बिहार के सभी विश्वविद्यालयों (बीएयू/बीएएसयू को छोड़कर) के कुलपतियों को सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

केके पाठक Vs रॉबर्ट एल. चोंग्थू

केके पाठक की ओर से रॉबर्ट एल. चोंग्थू को भेजा उन चार पत्रों का जवाब है, जो राज्यपाल के नाम से रॉबर्ट एल. चोंग्थू ने जारी किया है। केके पाठक ने उन चारों पत्रों का सबसे ऊपर लेटर नंबर दिया है, फिर पॉइंटवाइज जवाब भी दिया है। जिसमें राज्यपाल के अधिकारों का जिक्र है। दरअसल, पूरी लड़ाई यूनिवर्सिटी एजुकेशन पर अधिकार जमाने को लेकर है। शिक्षा विभाग चाहता है कि कॉलेजों में पढ़ाई-एग्जाम-रिजल्ट को रेगुलाराइज किया जाए। कुलपतियों की जवाबदेही तय की जाए। सबकुछ तय कैलेंडर के मुताबिक हो। जबकि, राजभवन को लगता है कि यूनिवर्सिटी पर उसके एकाधिकार को शिक्षा विभाग चुनौती दे रहा है। केके पाठक ने अंग्रेजी में पूरी चिट्ठी लिखी है। उसका हिन्दी अनुवाद आप पढ़ सकते हैं।

रॉबर्ट एल. चोंग्थू के नाम केके पाठक की चिट्ठी

कृपया माननीय राज्यपाल के प्रधान सचिव के रूप में लिखे गए आपके (रॉबर्ट एल. चोंग्थू) उपरोक्त पत्रों का संदर्भ लें। सबसे पहले, मैं निम्नलिखित को समझना चाहता हूँ:-
  • कृपया यह स्पष्ट किया जाए कि माननीय राज्यपाल के प्रधान सचिव के रूप में आप माननीय राज्यपाल अथवा कुलाधिपति के निर्देशों से अवगत करा रहे हैं।
  • अगर, निर्देश माननीय राज्यपाल की ओर से हैं, तो मुझे यह बताने के अलावा कुछ नहीं कहना है कि महामहिम की उच्च संवैधानिक स्थिति को देखते हुए, ये अधिक उपयुक्त होता कि राज्य सरकार के अधिकारियों से सीधे संवाद करने के बजाय, अगर मामलों को माननीय मुख्यमंत्री या माननीय शिक्षा मंत्री के समक्ष उठाया जाता।
  • हालांकि, अगर आप कुलाधिपति के निर्देशों से अवगत करा रहे हैं, तो इस विभाग को कुलाधिपति द्वारा शिक्षा विभाग के मामलों में हस्तक्षेप करने पर बहुत गंभीर आपत्ति है। इसे लेकर मुझे नियम के मुताबिक कुछ अधिकार हैं।
  • कार्यकारी कार्य के नियमों के तहत इस विभाग को राज्य विधानमंडल द्वारा विधिवत पारित बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 को लागू करने का अधिकार है।
  • अधिनियम की धारा 7 के तहत चांसलर, कुलपति, रजिस्ट्रार, डीन, प्रॉक्टर जैसे अन्य अधिकारियों के साथ 'विश्वविद्यालय का एक अधिकारी' है और इसलिए, इस विभाग को कोई निर्देश जारी नहीं कर सकता है।
  • इसके अलावा, कुलाधिपति को इस विभाग के निर्देशों के विपरीत विश्वविद्यालय के किसी अन्य अधिकारी को कोई निर्देश जारी करने का कोई अधिकार नहीं है।
  • आपने अपने पत्र दिनांक 29/02/2024 में स्वीकार किया है कि कुलाधिपति ने कुलपतियों को इस विभाग द्वारा आहुत बैठक में भाग लेने की अनुमति नहीं दी। ये स्पष्ट किया जाए कि किस नियम के तहत वीसी को किसी भी बैठक में भाग लेने के लिए कुलाधिपति की अनुमति लेनी होती है और इसके अलावा, किस नियम के तहत कुलाधिपति ने ऐसी अनुमति देने से इनकार कर दिया।
  • इसके अलावा, आपके दिनांक 21/12/2023 के पत्र में प्राथमिक/माध्यमिक शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई है। इसलिए, आप इस विभाग को ये बताना चाहेंगे कि कानून के किन प्रावधानों के तहत कुलाधिपति कार्यालय प्राथमिक/माध्यमिक शिक्षा से संबंधित मामलों से निपटने का हकदार है।
  • अंत में, आपने उल्लेख किया है कि धारा 9(7)(ii) कुलाधिपति को विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक/प्रशासनिक हित में कोई भी निर्देश जारी करने का अधिकार देती है। ये ध्यान दिया जा सकता है कि यह चांसलर को विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों के बीच विद्रोही व्यवहार को भड़काने और पूर्ण अराजकता पैदा करने की अनुमति नहीं देता है। इस शक्ति के तहत, कुलाधिपति विश्वविद्यालयों के अधिकारियों को विभाग की अवहेलना करने के लिए कहकर अपने अधिकार से आगे नहीं बढ़ सकते।
  • अतः, आपको सलाह दी जाती है कि आप विभाग के मामलों में हस्तक्षेप करने से बचें।


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