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Monday, 4 March 2024

मोदी सरकार के 'चाणक्य' पर भड़का ग्लोबल टाइम्स, मालदीव वाले मुइज्जू के समर्थन में जमकर उगला जहर

बीजिंग: चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने लक्षद्वीप में भारत के नए नेवल बेस पर जमकर जहर उगला है। उसने चीन के गुलाम कहे जाने वाले मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत विरोधी नीतियों का भी समर्थन किया है। ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय विदेश मंत्री के उस बयान पर भी जहर उगला है, जिसमें उन्होंने भारत को पड़ोसी देशों का मददगार बताया था। उसने लिखा है कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है, क्योंकि 6 मार्च को मालदीव के पास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीपों में से एक पर नया बेस खोला जाएगा। भारत मालदीव से अपने सैनिकों को वापस बुला रहा है। ग्लोबल टाइम्स ने भारत पर हिंद महासागर को अपने बैकयॉर्ड के रूप में देखने का भी आरोप लगाया।

भारत पर आधिपत्यवादी मानसिकता का लगाया आरोप

ग्लोबल टाइम्स ने आरोप लगाया, "भारत हिंद महासागर में आधिपत्यवादी मानसिकता का विस्तार कर रहा है।" उसने यह भी कहा कि भारत इसी मानसिकता के आधार पर छोटे दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के साथ जुड़ता है। पिछले साल मालदीव ने भारत को बताया था कि उसके सैनिक अब मालदीव में नहीं रह सकते हैं। यह भारत की आधिपत्यवादी मानसिकता और "पड़ोसी पहले" रणनीति के प्रति दक्षिण एशियाई देशों की नाराजगी को दर्शाता है।" ग्लोबल टाइम्स इतने पर ही नहीं रूका। उसने यह भी आरोप लगाया, "पिछले कुछ दिनों के दौरान भारत स्पष्ट रूप से मालदीव सरकार पर अपना मन बदलने के लिए दबाव डालने की उम्मीद कर रहा था।"

लक्षद्वीप वाले नेवल बेस पर भी ग्लोबल टाइम्स भड़का

चीनी मीडिया ने फुडन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के एक एसोसिएट प्रोफेसर झी चाओ के हवाले से लिखा, "भारत के नए बेस को मालदीव को सजा के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि उसने मांग की थी कि भारत अपने सैनिकों को वापस बुला ले। हालांकि, यह क्षेत्र में चीन के प्रभाव को रोकने का एक साधन भी है।" झी ने कहा, "यह कदम भारत के लिए बहुत विशिष्ट और अपेक्षित है।" भारतीय नौसेना द्वारा शनिवार को जारी एक बयान के अनुसार, नया बेस क्षेत्र में भारत की "परिचालन निगरानी" को बढ़ाएगा।

मालदीव को हड़काने का लगाया आरोप

सिचुआन इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के प्रोफेसर और चेंगदू इंस्टीट्यूट ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स के अध्यक्ष लॉन्ग जिंगचुन का मानना है कि नया बेस वास्तविक सैन्य महत्व के बजाय एक राजनीतिक इशारा है। लॉन्ग ने कहा, "चूंकि भारत मालदीव में अपनी पकड़ खो रहा है, इसलिए वह यह संदेश देना चाहता है कि वह अभी भी क्षेत्रीय प्रभुत्व वाला देश है।"

जयशंकर के पड़ोसी वाले बयान पर उगला जहर

ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा, "मालदीव जैसे क्षेत्रीय देशों को धीरे-धीरे भारत के रवैये की वास्तविक प्रकृति का एहसास हो गया है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि शनिवार को नई दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूछा गया कि क्या भारत उपमहाद्वीप और हिंद महासागर क्षेत्र में "धमकाने वाला" बन रहा है। उनकी प्रतिक्रिया थी, "जब पड़ोसी देश संकट में होते हैं तो बड़े दबंग 4.5 अरब डॉलर की सहायता नहीं देते हैं।"

भारत पर लगाया पड़ोसियों को ब्लैकमेल करने का आरोप

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र के रूप में कुख्यात ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा, "जयशंकर ने अपने पड़ोसियों को भारत की सहायता के बारे में दावा किया, उन्होंने यह छिपाने की कोशिश की कि भारत ने उन पर अपना नियंत्रण मजबूत करने के लिए सहायता का उपयोग कैसे किया। एक बार जब ये देश भारत के प्रभाव से मुक्त होने का प्रयास करेंगे, तो भारत उनकी भारत नीति को प्रभावित करने के लिए "सहायता" कार्ड खेलेगा। भारतीय सैनिकों की वापसी पर भारत-मालदीव राजनयिक विवाद के बीच, भारत सरकार ने 2024-25 वित्तीय वर्ष के लिए मालदीव को सहायता में 22 प्रतिशत की कटौती का प्रस्ताव दिया है।"


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